20 सितंबर 2025: नमस्ते दोस्तों!
आज हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (SPPU) के लाखों छात्रों से जुड़ी एक ऐसी खबर के बारे में, जिसने पूरे छात्र समुदाय में हलचल मचा दी है। यह खबर सीधे तौर पर छात्रों और उनके परिवारों की जेब पर असर डालने वाली है।
सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (SPPU) प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए आगामी परीक्षाओं के लिए परीक्षा शुल्क (Exam Fees) में सीधे 20% की बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले के सामने आते ही छात्रों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है और NSUI जैसे प्रमुख छात्र संघों ने इसे ‘छात्रों का आर्थिक शोषण’ बताते हुए इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान कर दिया है।
यह खबर न केवल पुणे में पढ़ रहे छात्रों के लिए, बल्कि Vapi, गुजरात और देश के अन्य हिस्सों से आए उन सभी छात्रों के लिए भी एक बड़ा झटका है, जो यहां एक बेहतर भविष्य का सपना लेकर आते हैं। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
SPPU Fee Hike 2025: At a Glance (मामला एक नजर में)
| विषय | जानकारी |
| विश्वविद्यालय का नाम | सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (SPPU) |
| क्या फैसला हुआ | परीक्षा शुल्क (Exam Fees) में बढ़ोतरी |
| कितनी बढ़ोतरी | सीधे 20% की वृद्धि |
| कौन प्रभावित होगा | SPPU और उससे संबद्ध कॉलेजों के लाखों स्नातक और स्नातकोत्तर छात्र |
| कब से लागू होगा | आगामी सेमेस्टर परीक्षाओं से (Winter 2025) |
| छात्र संघ का क्या कहना है | यह ‘वित्तीय शोषण’ है, इसे तुरंत वापस लिया जाए |
| Category | Education News |
| आधिकारिक वेबसाइट | http://www.unipune.ac.in/ |
What Exactly is the Decision? (क्या है पूरा फैसला?)
विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार, सभी स्नातक (Undergraduate) और स्नातकोत्तर (Postgraduate) पाठ्यक्रमों के लिए परीक्षा शुल्क में 20% की वृद्धि की गई है।
इसे एक आसान उदाहरण से समझें:
- अगर पहले किसी कोर्स (जैसे B.Com या B.Sc.) की एक सेमेस्टर की परीक्षा फीस ₹1000 थी।
- तो अब 20% की बढ़ोतरी के बाद, छात्रों को उसी परीक्षा के लिए ₹1200 चुकाने होंगे।
यह बढ़ोतरी सभी रेगुलर, बैकलॉग और बाहरी छात्रों पर समान रूप से लागू होगी। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला आगामी शीतकालीन सत्र 2025 की परीक्षाओं से ही प्रभावी हो जाएगा।
Why Did the University Hike the Fees? (यूनिवर्सिटी ने क्यों बढ़ाई फीस? – प्रशासन का तर्क)
हालांकि छात्र इस फैसले से नाराज हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस बढ़ोतरी के पीछे कुछ कारण बताए हैं:
- बढ़ती परिचालन लागत: प्रशासन के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा आयोजित करने की लागत, जैसे उत्तर पुस्तिकाओं की छपाई, पर्यवेक्षकों का मानदेय, और लॉजिस्टिक्स का खर्च काफी बढ़ गया है।
- ऑनलाइन बुनियादी ढांचे का खर्च: ऑनलाइन रिजल्ट प्रोसेसिंग और अन्य डिजिटल सुविधाओं को बनाए रखने का खर्च भी बढ़ा है।
- कई सालों से नहीं हुई थी बढ़ोतरी: तर्क यह भी दिया जा रहा है कि पिछले कई सालों से परीक्षा शुल्क में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया था, जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है।
Student Unions on the Warpath (विरोध में उतरे छात्र संघ – NSUI का क्या कहना है?)
इस फैसले के आते ही छात्र संघों ने मोर्चा खोल दिया है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (National Students’ Union of India – NSUI) ने इस फैसले को पूरी तरह से छात्र-विरोधी बताया है।
NSUI के मुख्य तर्क:
- यह ‘आर्थिक शोषण’ है: NSUI का कहना है कि यह फैसला उन छात्रों का खुला ‘आर्थिक शोषण’ है, जो पहले से ही हॉस्टल, मेस और अन्य खर्चों के बोझ तले दबे हुए हैं।
- अनुपातहीन बढ़ोतरी: यह बढ़ोतरी बहुत ज्यादा है और इसे बिना किसी छात्र प्रतिनिधि से सलाह-मशविरा किए एकतरफा तरीके से लागू किया गया है।
- ग्रामीण छात्रों पर असर: इसका सबसे बुरा असर उन छात्रों पर पड़ेगा जो ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं। कई छात्रों के लिए पढ़ाई का खर्च उठाना और भी मुश्किल हो जाएगा।
NSUI ने चेतावनी दी है कि अगर यह फैसला तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो वे विश्वविद्यालय में एक बड़ा आंदोलन करेंगे और कुलपति का घेराव करेंगे।
What is the Impact on Students? (छात्रों पर क्या होगा इसका असर?)
इस फैसले का सीधा असर छात्रों की जेब पर पड़ेगा। कई छात्रों ने इस पर अपनी चिंता व्यक्त की है। एक छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हम यहां पढ़ने आते हैं, हमारे माता-पिता बहुत मुश्किल से पैसे भेजते हैं। हर साल इस तरह फीस बढ़ाना हमें पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर करने जैसा है।” यह बढ़ोतरी छात्रों पर न केवल वित्तीय, बल्कि मानसिक दबाव भी बढ़ाएगी।
What Happens Next? (अब आगे क्या हो सकता है?)
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे क्या होगा।
- क्या विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के विरोध के आगे झुकेगा और फैसला वापस लेगा?
- क्या प्रशासन और छात्र संघों के बीच कोई बातचीत होगी?
- क्या राज्य सरकार इस मामले में कोई हस्तक्षेप करेगी?
छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाएं और किसी भी अपडेट के लिए विश्वविद्यालय की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर बनाए रखें।
Official Website and Links (आधिकारिक वेबसाइट और जरूरी लिंक्स)
| जानकारी | लिंक |
| SPPU की आधिकारिक वेबसाइट | http://www.unipune.ac.in/ |
| परीक्षा विभाग का सर्कुलर पेज | यहाँ क्लिक करें |
| NSUI पुणे (सोशल मीडिया) | (फेसबुक/ट्विटर पर अपडेट देखें) |
Conclusion (निष्कर्ष)
SPPU द्वारा परीक्षा शुल्क में 20% की बढ़ोतरी ने छात्रों और प्रशासन के बीच एक टकराव की स्थिति पैदा कर दी है।
- मुख्य बात: SPPU ने परीक्षा फीस 20% बढ़ा दी है, जो इसी सत्र से लागू होगी।
- विवाद: छात्र संघ इसे ‘आर्थिक शोषण’ बताकर फैसला वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह मामला क्या मोड़ लेता है। उम्मीद है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए एक ऐसा समाधान निकालेगा जो सभी के हित में हो।
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